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कारवाईनंतर निधी चौधरी यांची पहिली कविता

कारवाईनंतर निधी चौधरी यांची पहिली कविता
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(निधी चौधरी यांनी १७ मे ला महात्मा गांधींबद्दल केलेल्या ट्वीटमुळे चांगलचं रणकंदन सुरु झाल्यानंतर त्यांच्यावर कारवाई करण्यात आली. त्यांची आयएएस पदावरुन मंत्रालयातील पाणी पुरवठा व स्वच्छता विभागात बदली करण्यात आली. कारवाईनंतर व्यथित झालेल्या निधी चौधरी यांनी आपली पहिली कविता फेसबुक पेजवर लििहली आहे... वाचा आणि विचार करा...)

वो पूछे क्यूँ धन्यवाद कहा गांधीजी के हत्यारे को ।

क्यूँ आवाहन किया उनकी मूर्तियाँ तोड़ने के नारे को ।

क्यूँ कहा कि हटा दो नोट से

गली चौराहों से उनका नाम ।

क्यूँ किया तुमने गांधीजी को

अपने शब्दों से बदनाम ।

क्यूँ गोडसे को धन्यवाद कहा

150वे जन्म उत्सव के साल ।

गांधीजी का यह देश है

उनकी विचारधारा से है भारत बेमिसाल ।

वो मनरेगा के महात्मा है

और स्वच्छ भारत का चश्मा है ।

पक्ष विपक्ष जो जोड़ सके

बापू वो करिश्मा है ।।

मैंने तो बस दुःखी मन से एक व्यंग्य लिखा था

बदले बदले हालातों पर क्षुब्ध होकर तंज कसा था ।

क्या देख नहीं पाए तुम

वो चेहरा आँसुओं से लबरेज़😭

मैं समझ ना सकी 17 मई के व्यंग्य पर

क्यूँ चाहे कोई 31 मई को सहसा मीडिया में कवरेज ।

बुलाई थी प्रेस कॉन्फ़्रेन्स तो

एक फ़ोन मुझे भी कर लेते ।

फ़ोन ना सही, एक बार के लिए

मेरे व्यंग्य को फिर से पढ़ लेते ।

अरे इतना नहीं गर कर सकते

तो कुछ लोगों से बस पूछ लेते ।

शायद तब तुम मेरे व्यंग्य का

सही मतलब सूझ लेते ।।

जो मेरे चरित्र पर छींटे अब तुमने उछाले हैं ।

इन छींटों के तेज़ाब से रूह पे उभरे छाले हैं ।

गर ज़ख़्म जिस्म को देते तो

मरहम शायद उनको भर देते।

ये ज़ख़्म रूह पर लगे हैं

हर पल साँसों को बोझिल कर देते ।

मेरी रूह को तुमने मारा है

रोम रोम घायल होकर चित्कारा है ।

कोई और तुम्हें कोसे शायद

पर गांधीजी के मूल्यों ने मुझे सँवारा है ।

धन्यवाद तुम्हें भी करती हूँ

तुमने मुझे चाहे कितना भी शब्दबाण से मारा है ।

पर याद रखो मेरे आलोचक,

सत्य घायल हुआ है, मगर कभी ना हारा है ।

जब जब सत्य को आँच लगी

वो तपकर और भी निखरेगा ।

और तब मेरे निंदक न्यारे

तेरा कड़वा दिल भी बदलेगा ।।

आज अगर बापू होते

शायद मेरे संग संग रोते ।

कहते कंधे पर रखकर हाथ

कट जाएगी ये काली रात ।

कहते मेरे मूल्यों पर चलना

कभी नहीं होता आसान ।

कहते तुम तैयार रहो

करने अपना सब कुछ क़ुर्बान ।

शायद खड़ा करे कटघरे में

और बिन सुने तुम्हें, दे देंगे सज़ा ।

शब्दों पर शायद पहरे लगे

ना सुने कोई भी इल्तिजा ।

कहते 9 ऑगस्ट 42 को

मेरे संग भी ऐसा हुआ था ।

बिन सुने कहे बम्बई से उठा

यरवदा जेल में डाला था ।

तुम हिम्मत मगर रखना अपनी

पीड़ा चाहे मिले कितनी ।

वो कहते तुम्हारी पीड़ा मेरी पीड़ा का प्रतिसाद है

गांधीवाद का केमिकल लोचा ऐसा ही उन्माद है ।

दर्द में भी जो दुआ दे

गोडसे को भी माफ़ करे ऐसा बापू का संवाद है ।।

अच्छा है वो आज नहीं हैं ज़िन्दा

होते तो, हो जाते शर्मिंदा ।

वो गोली 48 में नहीं चलती

तो गांधीजी हर दिन मारे जाते ।

ऐसे आज़ाद हिंदुस्तान में

शायद वो ज़िन्दा भी नहीं रह पाते ।

48 की वो गोलियाँ बापू के

जिस्म को केवल मार सकी ।

अमेरिका से अफ़्रीका तक लेकिन

गांधी के मूल्यों की फिर पुकार उठी ।

2019 में पोरबन्दर के लाल का 150वाँ साल है

लेकिन उनकी तस्वीरों पर चल रही है गोलियाँ ।

बापू के हत्यारे देशभक्त कहे गए

और बापू को मिलती रही बस गालियाँ ।।

तुम कहोगे वो व्यंग्य का तंज ना समझ पाए

काव्य का रस क्या समझेंगे ।

फिर तुम्हारी कविता के एक एक अक्षर की होगी चीरफाड़

और फिर से तुम पर सब बरसेंगे ।

तो लो करती हूँ मैं साफ़ ख़ुलासा

इस कविता में नहीं , कोई व्यंग्य की भाषा ।

आँसुओं की स्याही में रूह की क़लम को भिगोकर

दिए हैं शब्द अपने अस्तित्व को झकझोरकर ।

तुम कहोगे चुप रहना होता बेहतर

चुप्पी ही तो सबने पहनी है ।

तुम अकेली क्यूँ संतप्त हुई

क्यूँ पीड़ा तुमको सहनी है ।

मैं कहती मेरे शिशु के दूध में

मेरे आँसुओं का खारा नमक मिला है ।

इन तीन दिनों के तमाशे से

मेरी छाती का दूध सूखा है ।

और यह मुझको मंज़ूर नहीं

इतनी भी मैं मजबूर नहीं ।

ऐसा ना मुझे पद का मोह कि

आत्म सम्मान पर होने दूं वार ।

या तो समझेंगे लोग मुझे

या उठाते रहेंगे हथियार ।

जब तक ना वो समझेंगे तब तक लिखूँगी

क्यूँकि लिखना हक़ है मेरा ।

मैं लिखूँगी क्यूँकि

ना घबराए, मुझको अँधेरा ।

मैं लिखूँगी क्यूँकि

ये मुल्क मेरा भी है बसेरा ।

मैं लिखूँगी क्यूँकि

स्याह रात में भी स्याही ला सकती सवेरा ।।

#WriteBeforeYouAreWrittenOff

Disclaimer: Views are deeply & purely personal. Not written in official capacity. Infer the intended meanings. Don’t jump to conclusions without reading every word of the poem.

Updated : 4 Jun 2019 2:27 AM GMT
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